चंडीगढ़: धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले हरियाणा सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इस बार राज्य में करीब 80 लाख मीट्रिक टन पराली निकलने का अनुमान है। सरकार ने इसके निपटारे के लिए तीन स्तरों पर योजना बनाई है, जिसमें खेत में पराली का प्रबंधन करने के साथ-साथ इसे चारे और औद्योगिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
सरकार की योजना के मुताबिक करीब 45 लाख टन पराली का इन-सीटू प्रबंधन, लगभग 10 लाख टन का पशु चारे में इस्तेमाल और करीब 25 लाख टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर औद्योगिक उपयोग में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योगों में होगी पराली की खपत
कृषि विभाग के मुताबिक सरकार ने करीब 25 लाख टन पराली को एक्स-सीटू प्रबंधन के जरिए उद्योगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बायोमास बिजली संयंत्र, सीबीजी प्लांट, एथनॉल यूनिट, थर्मल पावर प्लांट और पेलेट निर्माता पराली की खरीद करेंगे।
योजना के तहत चार मिश्रित ईंधन आधारित बायोमास बिजली संयंत्र, पांच धान की पराली आधारित परियोजनाएं, 15 अन्य औद्योगिक इकाइयां, छह सीबीजी संयंत्र, पानीपत का एथनॉल प्लांट और तीन थर्मल पावर प्लांट पराली का इस्तेमाल करेंगे।
इतने टन पराली खरीदने की तैयारी
सरकार की कार्ययोजना के अनुसार विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की अनुमानित मांग इस प्रकार है:
- बायोमास बिजली संयंत्र: करीब 12 लाख टन
- सीबीजी संयंत्र: करीब 3 लाख टन
- थर्मल पावर प्लांट: करीब 7 लाख टन
- पानीपत एथनॉल प्लांट: करीब 50 हजार टन
- पेलेट निर्माता: करीब 9,300 टन
- अन्य औद्योगिक उपयोगकर्ता: करीब 3,000 टन
इसके अलावा पराली से बॉयलर चलाने वाले 15 उद्योगों ने करीब 79,900 टन पराली की जरूरत बताई है।
खरीद लक्ष्य और उपलब्ध व्यवस्था में अंतर
सरकार ने एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए कुल 24.77 लाख टन का लक्ष्य तय किया है। वहीं चिन्हित संयंत्रों और उद्योगों की मौजूदा खरीद योजनाएं करीब 23.37 लाख टन तक की हैं। ऐसे में दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 1.40 लाख टन का अंतर दिखाई दे रहा है।
इस अंतर को कम करने के लिए अतिरिक्त औद्योगिक खरीदारों और अन्य उपयोग के विकल्पों पर भी काम किया जा सकता है।
सीबीजी प्लांट से बड़ी उम्मीद
पराली के औद्योगिक इस्तेमाल में सीबीजी संयंत्रों को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। पानीपत स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के संयंत्र से करीब 2.63 लाख टन पराली की खरीद की संभावना जताई गई है।
वहीं राज्य में संचालित और प्रस्तावित सीबीजी इकाइयों के जरिए आने वाले समय में पराली की खपत बढ़ाने की योजना है।
थर्मल पावर प्लांट भी करेंगे इस्तेमाल
एनटीपीसी झज्जर और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट करीब 5.16 लाख टन पराली का उपयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त को-फायरिंग के लिए करीब 1.78 लाख टन पेलेट इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
पानीपत स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एथनॉल प्लांट ने भी करीब 50 हजार टन पराली खरीदने की जानकारी दी है।
क्या है इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन?
इन-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से बाहर ले जाने के बजाय मशीनों की मदद से काटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इससे खेत में ही फसल अवशेष का प्रबंधन हो जाता है।
वहीं एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से बाहर निकालकर दूसरे स्थान पर उपयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल बायोमास बिजली संयंत्र, सीबीजी प्लांट, एथनॉल यूनिट, थर्मल पावर प्लांट और अन्य उद्योगों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है।
सरकार की योजना में किसानों को पराली जलाने से रोकने के साथ-साथ उसके वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।




