इंसाइट न्यूज 24: भारत ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ कदम बढ़ाए हैं। नौसेना, वायुसेना और थलसेना—तीनों के लिए आधुनिक हथियार और उपकरण अब बड़ी मात्रा में देश में ही बनाए जा रहे हैं।
विशेष रूप से नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे स्टील्थ फ्रिगेट्स और आधुनिक पनडुब्बियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब रक्षा तकनीक के मामले में आत्मविश्वासी होता जा रहा है।
आयात पर घटती निर्भरता
पहले भारत अपने युद्धक विमान, हेलिकॉप्टर और हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी कंपनियों पर निर्भर था। लेकिन अब स्वदेशी हथियार निर्माण की नीति (Make in India – Defence) ने तस्वीर बदल दी है।
आज हल्के लड़ाकू विमान तेजस, ध्रुव हेलिकॉप्टर, आर्टिलरी गन धनुष और कई मिसाइल सिस्टम पूरी तरह भारतीय तकनीक से बनाए जा रहे हैं।
सरकार की पहल
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा आयात को कम करने और स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए नीतियाँ लागू की हैं।
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निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को रक्षा अनुसंधान और उत्पादन में शामिल किया जा रहा है।
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‘डिफ़ेंस एक्सपो’ और ‘इंडिजिनस डिफ़ेंस इनोवेशन प्रोग्राम’ जैसे मंच पर स्थानीय उद्योगों को अवसर दिए जा रहे हैं।
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रक्षा निर्यात में भी भारत ने ऐतिहासिक बढ़त बनाई है और अब कई छोटे हथियार, रडार और मिसाइल सिस्टम विदेशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
सामरिक महत्व
आत्मनिर्भरता सिर्फ़ आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। जब देश अपने हथियार खुद बनाएगा, तो युद्ध अथवा आपातकालीन स्थिति में किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यही असली “सुरक्षा कवच” है।




